Sunday, March 13, 2011

न जाने कौन है--

न जाने कौन है दुआओं में याद रखता है
मैं डूबता हूं, समंदर उछाल देता है

जिंदगी के मायने

सोचता है, ठिठकता है, वो कौन है जो गली से हर रोज गुजरता है। आर्तनाद सुनकर सिसकती हैं दीवारें, वो कौन है जो घुप्प अंधेरे में सूरज को ढूंठता है। चांदनी उसके लिए नूर नहीं बरसाती, वो कौन है जो चांद को झोली में लिए घूमता है। अजनबी सा लगता है अजनबी नहीं है, वो कौन है जो इस सच के आइने को हर रोज तोड़ता है
कभी एक पल समझता देता है जिंदगी के मायने, कभी पूरी उम्र भी नाकाफी हो जाती है किसी को समझने के लिए। गुगली की तरह है जिंदगी की पिच, विकेट गंवा देते हैं, बिसूरते हैं। कभी खुशियों के शाट खेल कर होते हैं आल्हादित तो कभी दूसरों की खुशियों का बैनामा करा लेता है वो चोरी से, कभी खुद से ही होड़ की होती है हसरत, कभी पड़ोसी की पीड़ा पर लगाता है कोई कहकहे, कभी खुद की बिछाई बिसात में पिट जाती है हसरतों की गोटियां।

Thursday, June 11, 2009

यूं जाना तुम्हारा

यूं जाना तुम्हारा
यह तुम्हारा जाना महज जाना नहीं है
यह भरोसे का कत्ल है यारा
किससे सांझी करे मन की पीर
एकाकीपन पूछता है सवाल सैकड़ों
अपने आप से लड़ना भी होता है खासा दुष्कर
वादे, कसमें, प्रतिबद्वता हुए बेमानी
तुमसे वफा बेमानी सी थी
पैसा, पद यही तो है जिंदगी
पेशेवराना बाजार में हम जैसों की कीमत क्या है
किसे दे जवाब,सफाई मांगता है हर कोई
तू अपना था, हमसफर सा था
कोई चूक हुई मेरे स्नेह दान में
वरना कल की सोच में मुझे शुमार करने में हर्ज ही क्या था----------

Monday, May 4, 2009

बोलती बंद बाजीगर की

किंग खान परेशान हाल हैैं। खबर यह भी है कि अपनी टीम कोलकाता नाइट रायडर्स के बदतर प्रदर्शन से इस कदर खिन्न हैैं शाहरूख खान कि उन्होंने आईपीएल से तौबा करने की ठानी है। हो सकता है इस खबर में अतिश्योक्ति हो लेकिन एक सच यह है कि खान को समझा में आ रहा है कि क्रिकेट और अभिनय का मिजाज जुदा है तथा क्रिकेट की गहरी समझा न हो तो बेवजह का हस्तक्षेप किसी भी बेहतर टीम का कबाड़ा कर सकती है, जैसा कि बड़बोले किंग खान ने अपनी टीम के साथ कर डाला है।आईपीएल के दूसरे संस्करण में उम्मीद थी कि फिल्मी दुनिया का यह बादशाह पिछले संस्करण की गलतियों से सबक लेकर नए अवतार में उतरेगा इस मेगा शो में। लेकिन थोक के भाव फ्लाइंग किस दे रहे खान ने पहले कोच बुकानन की बेसिर पैर की चार कप्तानों वाली थ्योरी को हवा दी और फिर जिस अपमानजनक तरीके से उन्होंने महाराज का ताज छीना, उससे साफ हो गया कि अपनी अहं की कश्ती में बैठ कर इतरा रहे इस अभिनेता को मेगा शो में वह सफलता नहीं मिली,जिसकी उम्मीद फिल्मी दुनिया का यह बादशाह कर बैठा था।भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बारे में विख्यात है कि वहां उगते सूरज को सलाम किया जाता है। रिश्ते मौसम की मानिंद रंग बदलते हैैं इस रंग बिरंगी दुनिया में। शाहरुख खान ने यही थ्योरी क्रिकेट की दुनिया में भी लागू करने की कोशिश की लेकिन नतीजा सामने है कि खुद को खुदा मानने का अंजाम कितना बदरंग हो जाता है। नाइट रायडर्स के योद्धा हांफ रहे हैैं। क्रिकेट के मैदान पर एकजुट नहीं दिख रही शाहरूख की टीम। बिखरी बिखरी सी , मतभेद की तपिश से झाुलसती कोलकाता खराब प्रदर्शन की होड़ करती दिख रही है तो इसमें अन्यथा सा कुछ भी नहीं। सौरव ने संन्यास लिया तो भला बाजीगर खान के लिए अब वह उतने प्रासंगिक कहां रह गए थे जो कप्तानी भी उन्हें फिर से सौंप दी जाए। पैंतरा बदला किंग खान ने और मैकुलम को बना दिया नया खेवनहार। जख्म कुरदेने का बेरहम अंदाज कोई शाहरुख से सीखे। कप्तानी से हटाए जाने के बाद मीडिया से रूबरू खान ने कहा कि यह सौरव की सहमति से हुआ है और दादा अब भी उनके लिए उतने ही महत्वपूर्ण है, जितना की पहले हुआ करते थे। दादा को कप्तानी से हटाए जाने से पहले इस टीम के कोच बुकानन चार कप्तान बनाए जाने की बेमतलब की थ्योरी की कहानी कह चुके थे। बुकानन की इस कवायद की सुनील गावस्कर सरीखे महारथी ने भी आलोचना की लेकिन शाहरूख ने बौनेपन की सीमा लांघी और इस जीनियस को सलाह दे डाली कि सनी अपनी हद में रहे तथा किसी टीम की फ्रेंचाइजी ख्ररीद ले। शाहरुख की इस टिप्पणी पर क्रिकेट जगत में तीखी प्रतिक्रिया हुई और खिसियाए शाहरुख को बाद में माफी मांगनी पड़ी सनी से। बेहतरीन अभिनेता हैैं शाहरुख। इससे इंकार किसी को कहां है लेकिन खेल के मैदान पर व्यवहारिक सोच और सौम्यता के साथ खिलाडिय़ों को प्रेरित कर उनसे सर्वश्रेष्ठ निकालने के मामले में यह दिग्गज अभिनेता मार खा गया। बेतुके प्रयोग और खिलाडिय़ों पर निजता का बोझा लाद देने के हाहाकारी नतीजे सामने हैैं। अंक तालिका में नीचे की ओर खिसक रही है कोलकाता की टीम। सौरव रन बना रहे हैैं, गेंदबाजी में क्लिक हो रहे हैैं जबकि नए कप्तान मैकुलम का बल्ला लगातार खामोशी अख्तियार किए हुए हैैं। आकाश चोपड़ा और संजय भांगर को स्वदेश वापसी का टिकट थमाया जा चुका। टीम बिखराव की पिच पर पस्त पड़ी हैैं और बाजीगर हथेलियां मसल रहा है कि अब कौन सी जुगत लगाई जाए कि उनके रुतबे की लाज रह जाए लेकिन फिलहाल इसकी कोई सूरत नजर नहीं आती।

Sunday, April 5, 2009

सब भले लोग हैं

19:4-2005

कितने मक्‍कार हैं मनचले लोग हैं
मैं समझता था ये सब भले लोग हैं

बात दिल की कहें भी तो किससे कहें
हर तरफ हर जगह दोगले लोग हैं

मेरे किरदार को मरी तहजीब को
ये क्‍या समझेंगे ये बाबले लोग हैं


यां से वां साजिशें वां ये यां मुश्किलें
दूरियां लोग हैं फासले लोग हैं


मेरे बारे में हो या तुम्‍हारे लिये
मैं समझता हूं कि क्‍या सोचते लोग हैं

सब भले लोग हैं

19:4-2005

कितने मक्‍कार हैं मनचले लोग हैं
मैं समझता था ये सब भले लोग हैं

बात दिल की कहें भी तो किससे कहें
हर तरफ हर जगह दोगले लोग हैं

मेरे किरदार को मरी तहजीब को
ये क्‍या समझेंगे ये बाबले लोग हैं


यां से वां साजिशें वां ये यां मुश्किलें
दूरियां लोग हैं फासले लोग हैं


मेरे बारे में हो या तुम्‍हारे लिये
मैं समझता हूं कि क्‍या सोचते लोग हैं

Friday, February 13, 2009


न इबादतों का जिक्र है न परस्तिशों का सवाल है

सिवा एक लफजे गुनाह के मेरी जिंदगी की किताब
विशेष- साधुवाद, धन्‍यवाद, और लिखो जानी तुम्‍हारी लेखनी और सोच में कितना दम है, तुमसे बेहतर कौन जानता है। तरकस से शब्‍दभेदी बाण निकालते रहो। भले ही मुझे बाणाग्र बना लो। पाठकों से भी आग्रह कि ब्‍लाग देखते रहें दो दशक के अनुभवों का निचोड श्री यशपाल की खेल और लेखन के प्रति उददाम आसक्ति तो है। शब्‍द संजाल से मुक्‍त विचार-विनिमय का सतत प्रवाह भी है। दो दशक पुराना साथ इसी तरह के मिलन का प्रस्‍फुटन है और शब्‍दों की उत्‍पत्ति भी। प्रिय मित्र को मेरी शुभकामनायें।
देवेश त्‍यागी